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सिंहावलोकन
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लिग्निन बायोमास में एरोमैटिक कार्बन का एकमात्र प्रमुख नवीकरणीय स्रोत है और यह एक उच्च-मूल्य लेकिन कम उपयोग किया जाने वाला फीडस्टॉक है। सामान्यतः लिग्निन 2G बायो-एथेनॉल प्रक्रिया तथा पल्प एवं पेपर उद्योग में एक उप-उत्पाद के रूप में प्राप्त होता है। इस क्षेत्र में सीएसआईआर-एनसीएल का कार्य लिग्निन को एक कम-मूल्य अवशेष से उच्च-मूल्य एरोमैटिक रसायनों और हाइड्रोकार्बन-श्रेणी के उत्पादों के स्रोत में परिवर्तित करने पर केंद्रित है। ● लिग्निन का उत्प्रेरकीय डिपॉलिमराइजेशन करके निम्न-अणुभार वाले एरोमैटिक मोनोमर्स और ओलिगोमर्स का निर्माण। ● लिग्निन-व्युत्पन्न ऑक्सीजनयुक्त यौगिकों का हाइड्रोडिऑक्सीजनशन और उन्नयन करके हाइड्रोकार्बन-श्रेणी के उत्पादों का निर्माण। ● संपूर्ण बायोमास उपयोग के साथ संगत लिग्निन-विशिष्ट और एकीकृत बायोरिफाइनरी रणनीतियों का विकास। ● चयनात्मक बंध विच्छेदन और एरोमैटिक उत्पाद निर्माण के लिए बहु-कार्यात्मक उत्प्रेरकीय प्रणालियों (ठोस अम्ल, ठोस क्षार, BAILs आदि) का उपयोग। लिग्निन को सतत एरोमैटिक रसायन विज्ञान और उन्नत कार्बन उपयोग के लिए एक नवीकरणीय फीडस्टॉक के रूप में स्थापित करना। रणनीतिक महत्व: ● बायोमास के पूर्ण उपयोग को सक्षम करता है, केवल सेल्यूलोज-केंद्रित दृष्टिकोण से आगे बढ़ते हुए। ● वर्तमान में पेट्रोलियम पर निर्भर नवीकरणीय एरोमैटिक रसायनों के उत्पादन को समर्थन देता है। ● एकीकृत बायोरिफाइनरी अवधारणा को मजबूत करता है जहाँ बायोमास के सभी घटकों का उत्पादक उपयोग होता है। यह क्षेत्र सीएसआईआर-एनसीएल की नवीकरणीय एरोमैटिक्स, एकीकृत बायोमास उपयोग और सतत रासायनिक निर्माण में क्षमताओं को सुदृढ़ करता है।
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सीएसआईआर - राष्ट्रीय रसायन प्रयोगशाला,
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