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राष्ट्रीय औद्योगिक सूक्ष्मजीव संग्रह (एनसीआईएम)

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भारतीय वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद के निदेशक डॉ. एस.एस. भटनागर के सुझाव पर "राष्ट्रीय प्रकार संवर्धन संग्रह" (एनसीटीसी) की शुरुआत 1941 में भारतीय विज्ञान संस्थान, बैंगलोर में प्रो. एम. श्रीनिवासया के निर्देशन में हुई थी। 1951 में संवर्धन संग्रह को डॉ. एम. दामोदरन के निर्देशन में पुणे स्थित राष्ट्रीय रासायनिक प्रयोगशाला के तत्कालीन जैव रसायन विभाग को हस्तांतरित कर दिया गया। 1956 में यह निर्णय लिया गया कि संवर्धन संग्रह में केवल अनुसंधान और उद्योग के लिए मूल्यवान जीवों को ही रखा जाएगा और इसलिए इसका नाम एनसीटीसी से बदलकर राष्ट्रीय औद्योगिक सूक्ष्मजीव संग्रह (एनसीआईएम) कर दिया गया। एनसीआईएम को 2002 में एनसीएल का संसाधन केंद्र घोषित किया गया। एनसीआईएम में शैवाल, जीवाणु, कवक और यीस्ट के लगभग 3700 स्ट्रेन हैं। इस संग्रह में केवल गैर-रोगजनक संवर्धन ही रखे जाते हैं। एनसीआईएम भारत के सबसे बड़े संवर्धन संग्रहों में से एक है और यह विश्व संवर्धन संग्रह महासंघ (डब्ल्यूएफसीसी) का सदस्य है।